Bhashashastra Tatha Hindi Bhasha Ki Rooprekha / भाषाशास्त्र तथा हिन्दी भाषा की रूपरेखा
Author
: Devendra Kumar Shastri
Language
: Hindi
Book Type
: Text Book
Publication Year
: 2003
ISBN
: 9VPBTHBKRP
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: viii + 352 Pages, Glossary, Biblio., Size : Demy i.e. 21.5 x 14 Cm.

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प्रस्तुत पुस्तक में भाषा के समालोचनात्मक अध्ययन के अतिरिक्त कई नवीन विषयों पर भी विचार किया गया है। हिन्दी भाषा में भाषाविज्ञान विषय से सम्बन्धित किसी एक पुस्तक में आज तक हिन्दी भाषा की वर्तनी (स्पेङ्क्षलग), नये शब्दों की रचना, कोश-व्युत्पत्ति-विज्ञान, अनुवाद और पाठालोचन आदि का विवेचन नहीं किया गया है। इन सबका विचार करते हुए हिन्दी भाषा की एकरूपता और व्याकरणिक रचना का भी नये सिरे से विवेचन किया गया है। वास्तव में, वर्तनी का सम्बन्ध श्रुति एवं भाषा के रागात्मक पक्ष से है। अतएव हिन्दी-जगत् में अब यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि प्राय: सभी नामाख्यातक रूपों में 'एÓ (जैसे : जाएँगे, चाहिए) का प्रयोग न केवल श्रुति की दृष्टिï से, वरन् भाषाशास्त्रीय ध्वनिविषयक विश्लेषण तथा विकास की परम्परा में भी उचित सिद्ध होता है। भाषागत ध्वनियों के इन नये परिवर्तनों को पुराने व्याकरण की दूरबीन से जाँचना अथवा परम्परागत जीर्ण रूढिय़ों के पैमाने से मापना उचित न होगा। विषयानुक्रमणिका : 1. भाषाशास्त्र : परिचय, 2. भाषा के तत्त्व, 3. हिन्दी की रूप-रचना एवं वाक्य-विन्यास, 4. अर्थतत्त्व तथा शब्दकोश-विज्ञान, 5. राष्टï्रभाषा हिन्दी और देवनागरी लिपि, पारिभाषिक शब्दावली।