Antrang Sansmarno mein Jaishankar Prasad / अंतरंग संस्मरणों में जयशंकर प्रसाद
Author
: Purushottam Das Modi
Language
: Hindi
Book Type
: Reference Book
Publication Year
: 2001
ISBN
: 8171242898
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: xii + 164 Pages, Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

MRP ₹ 150

Discount 20%

Offer Price ₹ 120

OUT OF STOCK

जयशंकर 'प्रसादÓ अपने कृतित्व में साक्षात् शंकर थे। शिव की भाँति उन्होंने कंठ में गरल और मस्तक पर चन्द्र धारण कर अपनी रचनाओं में पावन गंगा की धारा प्रवाहित की। प्रसादजी के अन्तरंग मित्रों एवं साहित्यकारों के क्षेत्र अत्यन्त सीमित थे। साहित्यिक समारोहों से दूर रहने और मौन धारण करने वाले प्रसादजी को निज रूप से बहुत कम जाना गया। उनकी कोई जीवनी भी प्रकाशित नहीं हुई। उनके समकालीनों द्वारा लिखे गये विभिन्न संस्मरणों में प्रसादजी के जीवन की झलक मिलती है। वे सभी संस्मरण एकत्र रूप से प्रसादजी के व्यक्तित्व और कृतित्व की झाँकी प्रस्तुत करते हैं। प्रसादजी के समकालीन डॉ० राजेन्द्रनारायण शर्मा, डॉ० सीताराम चतुर्वेदी, मैत्रेयी ङ्क्षसह आज हमारे बीच हैं, उनके संस्मरणों में प्रसादजी के अनछुए प्रसंग, प्रसादजी के व्यक्तित्व और उनकी प्रेरणा को व्यक्त करते हैं। आशा है ये संस्मरण प्रसादजी के साहित्य को अभिनव प्रकाश प्रदान करेंगे।