Vivekanand Sahitya (10 Vols.) [Complete Works] [PB] / विवेकानन्द साहित्य (दस खण्ड) [सम्पूर्ण साहित्य] (पेपर बैक)
Author
: Swami Vivekanand
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Publication Year
: 2009
ISBN
: 9788175051553
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: Vol.1-xviii + 460 Pages; Vol.2-iv+436 Pages; Vol.3-iv+428 Pages; Vol.4- iv+456 Pages; Vol.5-iv+424 Pages; Vol.6-iv+ 436 Pages; Vol.7- iv+432 Pages; Vol. 8-iv+424 Pages; Vol. 9- vi+418 Pages; Vol.10-vi + 442 Pages, Index, Size : Demy i.e 21.5x14Cm.

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भारत एवं विदेशों में अपनी साधुता, स्वदेश-भक्ति, सम् पूर्ण मानव-जाति के आध्यात्मिक उत्थान एवं प्रा'य तथा पाश्चात्य के मध्य भ्रातृभाव के सार्वभौमिक संदेश के लिए सुपरिचित स्वामी विवेकानन्द को किसी भूमिका की आवश्यकता नहीं है। स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी, 1863 को हुआ था। अपने गुरु श्रीरामकृष्ण की अनुभूतियों के परिप्रेक्ष्य में वेदान्त के भव्य सन्देश का प्रचार करना उनके जीवन का उद्देश्य था। इसके साथ ही प्राचीन परम्पराओं और अन्तॢनहित प्रतिभाओं के अनुरूप अपनी मातृभूमि को पुन: सशक्त करना भी उनका ध्येय था। इस संदर्भ में अपनी सम्पूर्ण शक्तियों को लगाकर चालीस वर्ष की आयु पूर्ण करने से पूर्व ही वे इस संसार से चल बसे। चार योगों के बारे में तथा अपने लेखों, पत्रो, सम् भाषणों, काव्य-कृतियों आदि के रूप में उन्होंने भावी-पीढिय़ों के लिए अमूल्य धरोहर छोड़ रखी है। हिन्दी में दस खंडों में, अंग्रेजी में आठ खंडों में तथा भारत की अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी यह सब रचनायें 'विवेकानन्द साहित्यÓ के नाम से उपलब्ध हैं। स्वामी विवेकानन्द जी की रचनाओं द्वारा इस शताब्दी के आरम्भ में देश-भक्त राष्ट्रीय नेताओं द्वारा प्रभावित होने की बात को देखकर भारत-सरकार ने सम्पूर्ण देश में 12 जनवरी को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय युवा-वर्ष के रूप में मनाये जाने के आदेश दिए हैं। इस संदर्भ में भारत-सरकार द्वारा 1984 में घोषित आदेश कहता है। 'इस बात को महसूस किया गया कि स्वामी जी के सिद्धान्त और वह आदर्श, जिनके लिए वह जिये और काम किया, भारतीय युवकों के लिए महत्त्वपूर्ण प्रेरणा-स्रोत बन सकते हैं।Ó उनके सम्पूर्ण-साहित्य में उनके भाषण एवं लिखित कृतियाँ तथा अनेक गुरुभाइयों, शिष्यों, प्रशंसकों एवं मित्रों को लिखित अनेक पत्र संगृहीत हैं। उक्त साहित्य में उनके शिष्यों तथा अन्तरंग सहयोगियों के साथ वात्र्तालाप एवं सम्भाषण भी हैं।