Aasan Evam Yoga Mudrayen / आसन एवं योग मुद्रायें (प्राचीन भारत में शरीर साधना की पद्धति)
Author
: Ravindra Pratap Singh
Language
: Hindi
Book Type
: Reference Book
Publication Year
: 2011
ISBN
: 9788171247998
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: x + 190 Pages + 24 Plates, Biblio., Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

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भारतीय सभ्यता और संस्कृति के विकसित ऐतिहासिक काल में आसन एवं मुद्राओं के प्रतीकात्मक महत्त्व और भावदर्शन की मुख्यत: चार परम्पराएँ हैं— नाट्यशास्त्र, योगशास्त्र, पूजा-पद्धति तथा कला की परम्परा। नाट्यशास्त्र की परम्परा के अनुसार मनुष्य का सम्पूर्ण शरीर उसकी स्वाभाविक प्रवृत्ति के अनुसार भावों को शारीरिक, मानसिक और वाचिक क्रियाओं के रूप में अभिव्यक्त करता है। योगशास्त्र की परम्परा के अनुसार बैठने के विभिन्न स्वरूपों में सम्पूर्ण शरीर को कार्यशील या सक्रिय माना जाता है। पूजा-पद्धति में देवता के प्रति श्रद्धा और भक्ति के भावों की शब्द के माध्यम के साथ-साथ शारीरिक मुद्राओं द्वारा प्रदॢशत या व्यक्त करने की परम्परा का विकास मिलता है। कला के अन्तर्गत आसन एवं मुद्राओं की परम्परा स्वयं देवता के मूॢत-शास्त्रीय स्वरूप में दिखाई गयी है। प्राचीन भारत में शरीर-साधनों की पद्धति का शास्त्रीय, ऐतिहासिक तथा कलात्मक विवेचन। प्राचीन इतिहास, पुरातत्त्व, नाट्यशास्त्र एवं शरीर-साधना शास्त्र के अध्येताओं के लिए महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ।