Atharvaveda Ka Kavya / अथर्ववेद का काव्य
Author
: Radhavallabh Tripathi
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Publication Year
: 2007
ISBN
: 8171245366
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: xvi + 136 Pages, Append., Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

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प्रो० राधावल्लभ त्रिपाठी संस्कृत में जनजीवन से जुड़ी हुई काव्यधारा तथा कालिदास आदि महाकवियों और नाट्यकारों की रचनाओं के हिन्दी अनुवादों के लिये जाने जाते हैं। अर्थववेद के पैंतीस सूक्तों के उनके अनुवाद की प्रस्तुत संचयिका वेद के अध्ययन की दिशा में एक सार्थक और नया प्रयास है। अर्थववेद में न केवल भारतीय साहित्य की प्राचीनतम निधि सुरक्षित है, भारतीय परम्परा और संस्कृति के विकास की दुर्लभ कडिय़ा भी इसमें अनुस्यूत हैं। अन्नसिद्धि, मेधाजनन, बह्माचर्य, राष्ट्रसंवर्धन, परिवार का अभ्युदय, समाजकल्याण, राजकर्म, रोगोपचार, संस्कार, अभिचार, तत्त्वमीमांसा विषयक चिंतन आदि विषयों की जैसी विविधता इस वेद में है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। विराट् तत्त्व की अनुभूति, कालचक्र के आवर्तन, विवर्तन, मातृभूमि के प्रति अकुंठ भक्ति तथा जीवनमूल्यों की गहन अभिव्यक्ति कालसूक्त तथा पृथिवीसूक्त में की गयी है, जबकि सूर्या के विवाह का सूक्त भारतीय पारिवारिक जीवन के उन मूलधाराओं का निदर्शन है, जो आज भी किसी न किसी रुप में हमारी सामाजिक संरचना में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अर्थववेद की रसवत्ता और विलक्षण काव्याभिव्यक्ति को गहन अध्ययन और सरल भाषा में उतारने का प्रामाणिक प्रयास अनुवादक ने यहाँ किया है। विद्वान अनुवादक के द्वारा आरम्भ में दी गयी भूमिका में अर्थववेद की प्राचीनता, वैदिक संहिताओं में इसकी स्थिति, अर्थववेद के द्रष्टा ऋषि, उसका विषयवैशिष्ट्य आदि विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला है। अनुवादों के अन्त में दी गई विशद टिप्पणियों से यह संकलन वेद के जिज्ञासु पाठकों के साथ ही गम्भीर अध्येताओं के लिये भी उपादेय बन गया है।