Itihas Ka Darda / इतिहास का दर्द (राष्टï्रीय भावबोध की कविताएँ)
Author
: Ramchandra Tiwari
  Shyam Kishore Mishra
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Publication Year
: 2007
ISBN
: 8171245315
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: viii + 108 Pages, Size : Demy i.e. 21.5 x 14 Cm.

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स्ïवर्गीय पं० कृष्ïणबिहारी मिश्र (द्विवेदी-युग के बाद के प्रख्यात आलोचक) के चार पुत्र थे। ब्रजकिशोर मिश्र, नवलकिशोर मिश्र, श्ïयामकिशोर मिश्र और कृष्ïणकिशोर मिश्र। इनमें अब श्ïयामकिशोर मिश्र ही रह गए हैं। आप होमियोपैथ डॉक्ïटर हैं। विचारों से समाजवादी हैं। 'लोहियाÓ आपके आदर्श नेता थे। आप एक कवि भी हैं। कविता के क्षेत्र में आप 'दिनकरÓ से प्रभावित रहे हैं। कविता आप के लिए मनोरंजन की वस्ïतु नहीं थी। आप जनता को जगाना चाहते थे और एक सीमा तक जगाया भी। समाजावादी होते हुए भी, 'कांग्रेसÓ को पराजित करके आप 'एम०एल०ए०Ó हुए। आप ने सदैव अपने को एक 'श्रमजीवीÓ माना। 'गर्वÓ की मात्रा आपके व्ïयक्तित्ïव में न तब थी न अब है। प्रस्ïतुत संग्रह में आपकी 39 कविताएँ संगृहीत हैं। इन कविताओं का केन्ïद्रीय भावबोध 'राष्ïट्रीयताÓ है। राष्ïट्रीयता राजनीतिक प्रतिबद्धता से अलग एक व्ïयापक भावनात्ïमक मूल्ïय है। इसीलिए इन्ïहें राष्ïट्रीय भावबोध की कविताएँ कह सकते हैं। कविताओं का चयन किसी विशेष दृष्ïिट से नहीं किया गया है। जो कविताएँ उपलब्ध हो सकीं उन्ïहें उसी रूप में दे दिया गया है। कुछ पुरानी पड़ जाने पर भी मानवीय मूल्ïयों की दृष्ïिट से ये आज भी प्रासंगिक हैं। कवि समाज और राष्ïट्र को जिस रूप में देखना चाहता था, स्ïवतन्ïत्रता-प्राप्ïित के बाद भी, वह उसे उस रूप में नहीं देख सका। आज भी उसके मन में कहीं न कहीं वह कचोट बनी हुई है। इसीलिए मैंने संग्रह का नाम 'इतिहास का दर्दÓ रखा है। विश्ïवास है, सामान्ïय पाठक और विशिष्ïट कविता प्रेमी इसे सराहेंगे। कवि को तो इन्ïहें लिख कर ही आत्ïमतोष प्राप्ïत हो गया था। -रामचन्ïद्र तिवारी