Vedanta Aur Einstein / वेदान्त और आइन्सटीन
Author
: Anil Bhatnagar
Language
: Hindi
Book Type
: Reference Book
Category
: Sociology, Religion & Philosophy
Publication Year
: 2012
ISBN
: 9788171248575
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: xii + 72 pages, Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

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भौतिक विज्ञान ऐसा विषय है जो मनुष्य को अमूर्त चिन्तन सिखाता है। पिछले 300 वर्षों से अधिक समय से बुद्धिजीवी वर्ग ने ब्रह्मïाण्ड की परम अमूर्त सत्ता का निर्धारण करने के लिए इस विषय को चुना है। गैलीलियो, न्यूटन, कोपरनिकस, आइन्सटीन, मैक्स प्लांक, नील बोर, श्रोयडिंगर और अन्य दृढ़निश्चयी विद्वानों के माध्यम से हुए इस विषय के 300 वर्षों के विकास के परिणामस्वरूप ब्रह्मïाण्ड की इस अमूर्त सत्ता के बारे में दो भिन्न-भिन्न सिद्धांत सामने आये हैं। एक सिद्धान्त अल्बर्ट आइन्सटीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धान्त से प्रभावित है और दूसरा मैक्स प्लांक के क्वांटम सिद्धान्त से, जिसका परिवर्धन नील बोर और श्रोयडिंगर ने किया। आइन्सटीन का सिद्धान्त बृहत् (मैक्रो) समष्टि (ब्रह्मïाण्ड) का सिद्धान्त है और मैक्स प्लांक का सिद्धान्त सूक्ष्म (माइक्रो) समष्टि (ब्रह्मïाण्ड) का सिद्धान्त है। आज के वैज्ञानिक समष्टि (ब्रह्मïाण्ड) का एकीकृत सिद्धान्त खोज पाने के उद्देश्य से इन दोनों सिद्धान्तों को एक करने का प्रयत्न कर रहे हैं। श्री अनिल भटनागर ने 'वेदान्त और आइन्सटीन' नामक अपनी पुस्तक में भौतिक विज्ञान के इस आयाम में वेदों के ज्ञानकाण्ड के अमूर्त चिन्तन का उपयोग किया है, जिसे सामान्य रूप से वेदान्त के नाम से जाना जाता है और जो उपनिषदों में प्रतिपादित है। सम्भवत: यह अपनी तरह का पहला प्रयास है जब भौतिक विज्ञान और वेदान्त के निष्कर्षों को एक-दूसरे के साथ रखा गया है, जिससे चौंकाने वाले परिणाम सामने आये हैं। कदाचित् श्री भटनागर ने उसे संभव बनाने का प्रयत्न किया है जिसे अभी तक उन दार्शनिकों ने असंभव कहा है जो तत्वमीमांसा (मेटाफिजिक्स) को भौतिक विज्ञान से बिल्कुल अलग मानते हैं।