Mutthi Bhara Bhukha / मुट्ठी भर भूख
Author
: Dr. Muni Denvendra Singh
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Publication Year
: 2007
ISBN
: 8171245587
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: xvi + 108 Pages, Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

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'मुट्ठी भर भूखÓ अस्तित्ववाद और उपभोक्तावादी प्रभाव को पछाड़ती जीवन की दद्दामता और उसे देखने की एक खास तरह की मंगलमयी दुष्टि है, बढ़ती हुई सामाजिक एवं आॢथक विषमताओं के बीच परिवर्तन का भी दहकता बिम्बविधान है, राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं के प्रति एक सजग हस्तक्षेप है, अंतवैयक्तिक सम्बन्धों के कोरी स्वार्थाधता से आच्छादित होने के विरुद्ध तीखी प्रतिक्रिया है, जिस इतिहास के छोर पर कवि खड़ा है और जिस समय को कवि जी रहा है उसके प्रति भी अपनी चिन्ताएँ हैं, जिस देश में कवि रह रहा है उसकी सम्प्रभुता और उसके विधायक तत्त्वों के प्रति उसका आक्रोश और उसकी पीड़ा भी है और अन्त में इस धर्मप्राण देश की अन्धी धाॢमकता और धर्मोंन्माद के प्रति उसके कुछ प्रश्न और कुछ शंकाएँ भी हैं। जीवन के बहुविध आयामों से जुड़ी कवि मुनि देवेन्द्र ङ्क्षसह की कविता हमसे सिर्फ सह्दयता की ही माँग नहींं करती वरन् वह सजग बौद्धिकता की भी माँग करती है। इन कविताओं का अनुभव-संसार, घर और गाँव से शुरू होकर वृहत्तर समाज से होते हुए राष्ट्र और विश्व तक और काल की दृष्टि से कवि के समय से प्रागैतिहासिक काल तक फैला हुआ है। यथार्थ की ओर रुख करती कविता मुट्ठी भर भूख से लेकर मनुष्य की आध्यात्मिक भूख तक की ताॢकक पड़ताल करती है। ऐसी कविताओं से गुजरना एक सुखद एहसास से गुजरना है।