Gahadavalon Ka Itihas [1089-1196] / गाहड़वालों का इतिहास (1089-1196 ई०)
Author
: Prashant Kashyap
Language
: Hindi
Book Type
: Reference Book
Publication Year
: 2006
ISBN
: 8171245048
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: xii + 196 Pages + 4 Plates, Biblio., Append., Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

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गाहड़वाल राजवंश ने वर्तमान उ०प्र० के सम्पूर्ण भू-भाग पर लगभग सौ वर्षों तक शासन किया। इनके साम्राज्य में वर्तमान मध्य प्रदेश एवं बिहार का भी कुछ भाग सम्मिलित था। इन्होंने उत्तर भारत की एकमात्र ऐसी सत्ता के रूप में शासन किया जिसने पश्चिम से होने वाले मुस्लिम आक्रमण का प्रतिरोध सौ वर्षों तक किया। गाहड़वाल यद्यपि वैष्णव धर्मानुयायी थे, जैसा कि इनके अभिलेखों से स्पष्ट है। किन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि इनके राज्यकाल में सभी धर्मों के प्रति उदारता की नीति अपनायी गयी। उदाहरणस्वरूप हम कह सकते हैं कि इस काल में बौद्ध धर्म यद्यपि अवनति की ओर अग्रसर था किन्तु दूसरी ओर अभिलेखों से इस बात की पुष्टि होती है कि गाहड़वाल राजा गोविंदचंद्रदेव की रानी कुमारदेवी ने सारनाथ, वाराणसी में बौद्ध भिक्षुओं को बिहार दान किया। साथ ही साथ उसने 'धर्मराजिका स्तूपÓ को पुन: शिलाकञ्चुकों से आच्छादित किया, जिसकी नींव मौर्य सम्राट अशोक ने डाली थी। काशी गाहड़वालों की राजधानी थी, यहाँ अनेक मन्दिरों एवं तालाबों का निर्माण हुआ किन्तु इनमें से इस समय केवल कर्मदेश्वर महादेव मन्दिर (कन्दवा, वाराणसी) के अतिरिक्त किसी अन्य मन्दिर के अवशेष नहीं मिलते। 'गाहड़वालों का इतिहासÓ की प्रामाणिकता के लिए चौरासी अभिलेखों का संग्रह किया गया है, साथ ही समकालीन साहित्य का भी उपयोग किया गया है। गाहड़वालों के लुप्त इतिहास को पुनजीॢवत करने का यह महत्त्वपूर्ण प्रयास है।