Sahityakaron Ke Hasya-Vyangya / साहित्यकारों के हास्य-व्यंग्य (कवियों, लेखकों, साहित्यकारों तथा राजनीतिज्ञों के मनोरंजक प्रसंगों का अपूर्व संग्रह)
Author
: Prof. Bhawani Lal Bhartiya
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Publication Year
: 2016
ISBN
: 9788189498429
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: xvi + 88 Pages, Size : Demy i.e 22.5 x 14 Cm.

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साहित्ïय की आत्ïमा कहे गये नव रसों में हास्ïय का प्रमुख स्थान है जो पाठक के मन में प्रफुल्ïलता, उमंग तथा विनोद जैसे मनोभावों को उत्ïपन्ïन करता है। हिन्ïदी साहित्ïय में हास्ïय की वृत्ति आरम्ïभ से ही विद्यमान रही है। कबीर की उलटबांसियों को आप देखें। महाकवि सूरदास के भ्रमरगीत प्रकरण में हास्ïय, व्ïयंग्ïय तथा विनोद की त्रिवेणी सर्वत्र प्रवाहित हो रही है। गोस्ïवामी तुलसीदास चाहे लाख मर्यादावादी रहे हों, प्रसंग आने पर वे हास्ïय की निश्ïछल धारा प्रवाहित करने से नहीं चूकते। आधुनिक काल में भारतेन्ïदु का साहित्ïय सृजन हास्ïय के नये आयाम लेकर आया। संस्ïकृत नाटकों में व्ïयंग्ïय-विनोद का आधार विदूषक प्रत्ïयेक कृति में उपस्थित रहता था। जब सामाजिक और राजनैतिक जीवन में विकृतियाँ और विडम्बनाएँ आईं और सार्वजनिक जीवन में पक्षपात, भ्रष्ïटाचार तथा परिवार पोषण की भावना प्रबल हुई तो पत्र-पत्रिकाओं में व्ïयंग्ïयात्ïमक लेखन की धारा ने जन्ïम लिया। सफल लेखक स्ïवयं को हास्ïय का उपादान बनाकर एक प्रकार की तृप्ïित का अनुभव करता है। प्रसिद्ध है कि गम्ïभीर व्ïयक्तित्ïव के धनी तथा काशी हिन्ïदू विश्ïवविद्यालय के सफल हिन्ïदी अध्ïयापक पं० रामचन्ïद्र शुक्ïल पढ़ाते-पढ़ाते कोई ऐसी चुहल भरी बात कह देते जिससे सारी क्ïलास हँसी से सराबोर हो जाती किन्ïतु आचार्य-प्रवर की छोटी मूँछों में वह हास्ïय की विरल रेखा यदा-कदा ही दिखाई देती। प्रस्ïतुत ग्रन्थ विभिन्ïन स्रोतों से एकत्र किये गये साहित्ïयकारों के हास्ïय प्रसंगों का संकलन है। यहाँ हिन्ïदी से भिन्ïन भारतीय तथा अंग्रेजी भाषा के कुछ लेखकों के हास्ïय प्रसंग भी एकत्रित किये गये हैं। संस्ïकृत में हास्ïय प्रधान अवतरणों का बाहुल्ïय है, यहाँ तो संकेत मात्र ही कुछ सामग्री दी गई है। साहित्ïय और राजनीति का क्षेत्र चाहे परस्ïपर विरोधी न भी माना जाये किन्ïतु उसमें यदा कदा सामञ्ïजस्ïय भी हुआ है। सरोजिनी नायडू यदि सिद्धहस्ïत कवयित्री थीं तो पं० जवाहरलाल नेहरू इतिहास के प्रकाण्ïड पण्ïिडत तथा प्रगल्ïभ लेखक थे, ऐसे ही राजनीतिज्ञों के कुछ हास्ïय-प्रसंग भी यहाँ समाविष्ïट कर दिये गये हैं।