Samajik Parivartan Mein Kala Evam Sahitya / सामाजिक परिवर्तन में कला एवं साहित्य
Author
: Jugnoo Pandey
Language
: Hindi
Book Type
: Reference Book
Publication Year
: 2007
ISBN
: 9788171245741
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: xii + 154 Pages, Biblio, Size : Demy i.e. 22.5 X 14.5 Cm.

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कला एवं साहित्य में समाज प्रतिबिम्बित होता है। काव्य, कथा, नाटक, दर्शन, चित्र, वास्तु, नृत्य, संगीत उसकी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है। इन रचनाओं पर समस्त सामाजिक तत्त्वों, समकालीन परम्पराओं, सभ्यता, संस्कृति तथा परिस्थितियों का प्रभाव अचेतन रूप से पड़ता है। रचनाकार अपनी रचनात्मक संवेदना में सम्पूर्ण समाज को अभिव्यक्त करता है। साहित्यकार की रचना की पृष्ठभूमि में सामूहिक चेतना प्रतिबिम्बित होती है। कबीर, तुलसी, प्रेमचंद जैसे साहित्यकारों एवं रवीन्द्रनाथ टैगोर, अवनीन्द्रनाथ ठाकुर, रवि वर्मा जैसे कलाकारों ने समाज को नेतृत्व प्रदान किया। कलाकार देश तथा समाज का संवेदनशील ग्रहणकत्र्ता होता है। वह अपने युग की वाणी होता है। वह अतीत और वर्तमान में सेतु स्थापित कर देश के इतिहास और समाज को एक दूसरे से जोड़ता हुआ विकास के नये कीॢतमान स्थापित करने की प्रेरणा देता है। इस प्रकार नित्य परिवर्तनशील समाज में कला एवं साहित्य का विशिष्ट योगदान होता है। साहित्यकार अपनी साहित्यिक रचनाओं यथा काव्य, कथा, दर्शन, चित्रकार अपने रेखांकन और चित्रांकन, शिल्पी अपने विभिन्न कलात्मक शिल्प द्वारा, सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रेरित करता हुआ निरन्तर विकास की ओर अग्रसर करता है। कला एवं साहित्य अपनी विभिन्न अभिव्यक्तियों के माध्यम से समाज के प्रगतिशील परिवर्तन की प्रेरणा देते हैं। इसी से जीवंत समाज की पहचान बनती है। कला एवं साहित्य में सामाजिक परिवर्तन के विविध आयामों को इस लघु प्रबन्ध में प्रस्तुत करने का प्रयास है।