Bharatiya Sangeet-Shastra Ka Darshanaparak Anusheelan / भारतीय सङ्गïीत-शास्त्र का दर्शनपरक अनुशीलन
Author
: Vimala Musalgaonkar
Language
: Hindi
Book Type
: Reference Book
Publication Year
: 1995
ISBN
: 8171241522
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: xxxii + 400 Pages, Biblio., Size : Royal Octavo i.e. 24 x 16 Cm.

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भारतीय संगीतशास्त्र इस देश के अनन्य किसी भी शास्त्र की भाँति जीवन के प्रति अखण्ड दृष्टि से ओतप्रोत है। प्रस्तुत ग्रन्थ में संगीतशास्त्र में व्याप्त सृष्टिविज्ञान अर्थात् पिण्ड-ब्रह्मïाण्ड के दर्शन को उजागर किया गया है। इस प्रसंग में वेद (चारों संहितायें एवं प्रमुख ब्राह्मïण व आरण्यक), उपनिषद्, वेदाङ्गï (शिक्षा-व्याकरण, विरुक्त-छन्द, ज्योतिष-कल्प), आगम (तन्त्र), न्यूनाधिक षड्दर्शन (विशेषत:योग) आदि की भाषा में सङ्गïीतशास्त्र की मूलभूत अवधारणाओं की विशद की व्याख्या की गयी है। स्वाभाविक है कि वाक्तत्त्व अधिकांश चर्चा का केन्द्रबिन्दु रहा है। इसके अतिरिक्त सामान्य गणित एवं संख्याशास्त्र तथा अंकों की आकृतियों के विषय में बहुत रोचक चर्चा की गई है। विषय-प्रतिपादन में देश, काल और इन दोनों की सनिन्ध—ऐसे तीन प्रमुख विभाग बनाये गये हैं। स्पष्टता के लिए प्रस्तुत अनेक चित्र, रेखाचित्र, सारणियों आदि से यह ग्रन्थ समृद्ध है। इस प्रकार भारतीय सङ्गïीतशास्त्र के अध्ययन की एक सर्वथा नवीन दिशा प्रस्तुत करने का श्रेय इस ग्रन्थ को अवश्य है। यह ग्रन्थ सङ्गïीतशास्त्र के विद्याॢथयों, शिक्षकों, अनुसन्धानकर्ताओं के अतिरिक्त भारतीय संस्कृति की समग्रता के रसिकों के लिए भी रोचक एवं उपादेय होगा।