Aadhunikta Aur Mohan Rakesh / आधुनिकता और मोहन राकेश
Author
: Dr. Urmila Mishra
Language
: Hindi
Book Type
: Reference Book
Publication Year
: 2008
ISBN
: 9VPAAMRH
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: xx + 212 Pages, Append., Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

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मोहन राकेश समकालीन लेखकों और बुद्धिजीवियों के बीच ऐसा लेखक था जिसने पुरानी मान्यताओं, रूढिय़ों और विचारों पर तीखा प्रहार किया है। आज का आदमी अपने आस-पास के अनेक सवालों से टकराता है, टूटता और निर्वासित हो रहा है। क्योंकि मनुष्य वैज्ञानिक उपलब्धियों को अपने जीवन में जाने-अनजाने स्वीकार कर रहा है और वैज्ञानिक विचारधारा ही आधुनिकता की धारणा बन गई है, अत: आधुनिकता ने वार्तालाप के दायरे को नितान्त सीमित और संकुचित कर दिया है। व्यक्ति अकेलेपन से निकलने और परिवेश से जुडऩे के लिए छटपटा रहा है। वह जीने के लिए नये सम्बन्धों और नयी मान्यताओं की तलाश करता है ताकि अपनी खोयी हुई दिशा को प्रकाशित कर सके और जीवन को नये सम्बन्धों और सन्दर्भों से जोड़ सके। राकेश आधुनिक कम रोमाण्टिक अधिक थे। राकेश जीवन में सवाल उठा सकते थे लेकिन उसका फतवा कहीं नहीं देते थे। राकेश ने जीवन में जो कुछ भोगा वही लिखा। राकेश की रचनाओं में आधुनिकतम चुनौतियों से उत्पन्न होने वाले अन्तद्र्वन्द्वों और यन्त्रणाओं की सूक्ष्म अभिव्यक्ति हुई है। आधुनिक साहित्य में विशेषत: कहानी और नाटक के सम्बन्ध में उनके प्रयोग सर्वथा नवीन है। अपनी रचनाओं के वैशिष्टï्य के कारण राकेश का बहुमुखी व्यक्तित्व केवल कहानी, उपन्यास और नाटक के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि आलोचना के क्षेत्र में भी अभिव्यक्त हुआ है। यह शोध कृति मोहन राकेश के संदर्भ में हिन्दी के आगामी लेखन का संकेत करती है। विषय-क्रम : भूमिका, आभार, पुरोवाक्, प्रथम खण्ड : 1. आधुनिकता : अर्थ और अभिप्राय, 2. आधुनिकता और साहित्य-विधाएँ, 3. राकेश की कहानियाँ और आधुनिकता, 4. राकेश के उपन्यास और आधुनिकता, 5. राकेश के नाटक और आधुनिकता, 6. राकेश की आलोचनाएँ-प्रत्यालोचनाएँ और आधुनिक परिदृश्य, 7. राकेश की अभिव्यक्ति की विविधाएँ और आधुनिकीकरण, सहायक ग्रन्थ-सूची।