Aadhunik Kavya / आधुनिक काव्य
Author
: Hindi Department_BHU
Language
: Hindi
Book Type
: Text Book
Publication Year
: 2011
ISBN
: 9788171248322
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: viii + 160Pages; Size : Demy i.e. 21.5 x 13.5 Cm.

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A Unique Collection of Poem Famous Hindi Literary Writers : Maithilisharan Gupt : Hum Kaun The, Kaikayi Ka Anutap, Priyatam ! Tum Shruti Path Se / Jaishankar Prasad : Mere Navik, Tumul Kolahal Kalah, Biti Vibhawari Jag Ri, Aah ! Vedana Mili Vidai, Peshola Ki Pratidhvani / Suryakant Tripathi 'Nirala' : Badal-Rag, Sneh-Nirjhar Bah Gaya Hai, Sandhya-Sundari, Torati Patthar, Raje Ne Apani Rakhawali Ki / Sumitranandan Pant : Moh, Pratham Rashmi, Bharatmata Gramvasini / Mahadevi Verma : Jab Yah Deep Thake Tab Ana, Jag Tujhako Door Jana, Mai Nir Bhari Duhkha Ki Badali / Makhanlal Chaturvedi : Kaidi Aur Kokila, Ulahana / Ramdhari Singh Dinkar : Himalaya, Dilli, Vipathaga / Kedarnath Agrawal : Maine Usako Jab Jab Dekha, Mujhe Nadi Se Bahut Pyar Hai, Chandragahana se Lautati Ber / Nagarjun : Master, Yah Danturit Muskan, Akal Aur Uske Bad / Sachchidanand Hiranand Vatsyayan 'Agyeya' : Nadi Ke Dwip, Kalagi Bazare Ki Durvachal.

अनुक्रम : आधुनिक हिन्दी कविता की रूपरेखा / आशीष त्रिपाठी भाग : 1 - पञ्चम प्रश्नपत्र आधुनिकता की राह में आर?िभक डग / कृष्ण मोहन प्रसिद्ध हिन्दी कथा लेखकों के काव्य का अनूठा संग्रह : मैथिलीशरण गुप्त : हम कौन थे, कैकेयी का अनुताप, प्रियतम! तुम श्रुति पथ से / जयशंकर प्रसाद : मेरे नाविक, तुमुल कोलाहल कलह, बीती विभावरी जाग री!, आह! वेदना मिली विदाई!, पेशोला की प्रतिध्वनि / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निरालाÓ : बादल-राग, स्नेह-निर्झर बह गया है, सन्ध्या-सुन्दरी, तोड़ती पत्थर, राजे ने अपनी रखवाली की / सुमित्रानन्दन पंत : मोह, प्रथम रश्मि, भारतमाता ग्रामवासिनी!/ महादेवी वर्मा : जब यह दीप थके तब आना, जाग तुझको दूर जाना, मैं नीर भरी दु:ख की बदली! भाग - 2 षष्ठ प्रश्नपत्र आधुनिक हिन्दी कविता : यात्रा और अंतर्यात्रा / रामाज्ञा शशिधर माखनलाल चतुर्वेदी : कैदी और कोकिला, उलाहना/ रामधारी ङ्क्षसह दिनकर : हिमालय, दिल्ली, विपथगा / केदारनाथ अग्रवाल : मैंने उसको जब जब देखा, मुझे नदी से बहुत प्यार है, चंद्रगहना से लौटती बेर / नागार्जुन : मास्टर, यह दंतुरित मुस्कान, अकाल और उसके बाद / सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेयÓ : नदी के द्वीप, कलगी बाजरे के, दूर्वाचल।