Banaras Ke Yashasvi Patrakar / बनारस के यशस्वी पत्रकार
Author
: Bachchan Singh 'Journalist'
  Vashishtha Narayan Singh
Language
: Hindi
Book Type
: Reference Book
Category
: Biographies / Autobiographies
Publication Year
: 2011
ISBN
: 9788171248124
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: viii + 152 Pages; Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

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हिन्दी पत्रकारिता की जन्मभूमि भले कलकत्ता रही हो लेकिन कर्मभूमि तो बनारस ही है। स्वनामधन्य पत्रकारों ने अपनी विलक्षण प्रतिभा और विकट साधना से पत्रकारिता को इतनी ऊँचाई और गहनता दी कि 'बनारस स्कूल ऑफ जर्नलिज़्ïमÓ नाम से एक नई धारा ही फूट पड़ी। बनारस हिन्दी पत्रकारिता का गढ़ बन गया। बनारस की पत्रकारिता को भारतीय स्तर पर मान्यता और सराहना मिली। पहचान मिली। समृद्धि मिली। शब्द मिले। शैली मिली। हिन्दी भाषा के विकास का मार्ग प्रशस्त किया बनारस की पत्रकारिता ने। इसका सबसे बड़ा श्रेय बाबूराव विष्णु पराड़कर और 'आजÓ को जाता है। लोग हिन्दी सीखने के लिए 'आजÓ पढ़ते थे। इस समाचार-पत्र ने आजादी के पहले स्वतन्ïत्रता संग्राम में अद्भुत योगदान दिया और आजादी के बाद देश के निर्माण में। देश के निर्माताओं पर बारीक नजर रखने का काम किया। जनता को जागरूक बनाया। अपने कत्र्तव्ïय के प्रति सचेत किया। इस पुस्तक में उन तपस्वी पत्रकारों की झलक देने की कोशिश की गई है जिन्हें जाने और समझे बिना हिन्दी पत्रकारिता का अध्ययन अधूरा रहेगा। पत्रकारिता के विकास के इतिहास की कडिय़ाँ जुड़ नहीं पाएँगी और हम जान नहीं पाएँगे कि किस तरह तमाम पत्रकारों ने अपने आपको तपाया है। पत्रकारिता उनके लिए कुछ पाने का साधन नहीं थी, लगातार खोते जाने की साधना थी।