Sant Mahatmaon Ke Durlabha Prasang [PB] / सन्त-महात्माओं के दुर्लभ प्रसंग
Author
: Shri S.N. Khandelwal
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Publication Year
: 2016, 1st Edition
ISBN
: 9788189498818
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: xii + 152 Pages; Size : Demy i.e. 21.5 x 13 Cm.

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इस वर्तमान परिवेश में संत की संगति दुर्लभ हो चली है जिसे संत समझ कर उसकी संगति में गया, कुछ को छोड़कर उनके अतिरिक्त वे सब कुछ और ही निकले। जो असंत नहीं भी निकले, उन्होंने स्वार्थ-अर्थोपार्जनार्थ संत का आवरण बना रखा है। उनमें मन-वचन-कर्म की एकतानता ही नहीं है। तथापि मैं यह सब उनका दोष नहीं मानता। दोषारोपण अपना ही पुण्य क्षय करता है। हो सकता है यह मेरे आकलन का तथा दृष्टिकोण का दोष रहा हो। अत: यह निर्णय विद्वानों पर छोड़ता हूँ। 'गुणदोषमय विश्व कीन्ह करतार' इस समस्या से उबरने के लिए मैंने नि:संग होना ही उचित समझा। अर्थात् 'संगं सर्वात्मना त्याज्य।' अब यही मार्ग बचा था कि जो काल के प्रवाह में आज भी संत कहे जाते हैं तथा जो प्रचार और यश से दूर रहे हैं, साथ ही जिनकी स्मृति तक अब जनमानस से लुप्त होती जा रही है तथा जिनको आज तक देखा भी नहीं, तथापि जिनकी जीवनयात्रा के कुछ अंश को जानने से ही मैं स्वयं में अपूर्व श्रद्धा तथा भावस्रोत को उमड़ता पा रहा हूँ, उनके इतिवृत्त का संकलन तथा लेखन करना पूर्णत: सत्संग ही है। यह लेखन करने में यह स्पष्ट अनुभव किया कि सत्संग की जो आकांक्षा बहुत कुछ अतृप्त ही रह गयी थी, वह शून्यता अब पहले जैसी नहीं है। वास्तव में सत्पुरुषों का स्मरण पूर्णत: निर्दोष सत्संग ही है। इस लघु ग्रन्थ की प्रस्तुति के पश्चात् भी इस कड़ी को आगे बढ़ाने की प्रेरणा अन्तर्यामी प्रभु से प्राप्त हो रही है। जैसी हरि इ'छा! 'स्मरण' भी नवधा भक्ति का प्रमुख अंग है। यह स्मरण के मनके एक लघु ग्रन्थमाला के रूप में सूत्रबद्ध हों तथा वह माला मैं जनता जनार्दन हेतु प्रस्तुत करूँ, यही कामना करता हूँ।