Samadhan [PB] / समाधान
Author
: Dr. Prem Narayan Somani
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Publication Year
: 2016, 1st Edition
ISBN
: 9788189498795
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: xii + 96 Pages; Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

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'बबूलÓ (1967) उपन्यास हिन्दी के उन कुछ गिने-चुने उपन्यासों में से एक है जिसमें ग्रा?य जीवन, खासकर दलित जीवन, का करुण यथार्थ अत्यन्त शक्तिशाली ढंग से उभरा है। उल्ले?य है कि विमर्शों की बाढ़ में जब 'दलितÓ अथवा 'दलित विमर्शÓ जैसी साहित्य में कोई हलचल नहीं थी, उस समय विवेकी राय जी 'महेश राम उर्फ महेसवाÓ को केन्द्र में रखकर 'बबूलÓ लिख रहे थे। सर्वहारा वर्ग के जीवन को लेकर लिखा गया उनका यह उपन्यास उस वर्ष की विशिष्टïतम उपलब्धि है। 'महेसवाÓ के ब्याज से डॉ० राय ने उसके पूरे परिवेश में भारतीय गाँवों का जो आॢथक, सामाजिक एवं नैतिक सर्वेक्षण किया है, वह अपने आप में अनूठा एवं अकेला है। 'बबूलÓ आधुनिकता की चकाचौंध में उलझे हुए कथा-साहित्य को एक बार फिर गाँव की ओर ले जाने का प्रयास करता है और वहाँ की जमीनी हकीकत से दो-चार कराने के साथ ही 'प्रबुद्धशीलÓ के माध्यम से अध्यापकों की निरीह अवस्था से भी परिचित कराता है। गरीबी-विपन्नता, तंगहाली और फटेहाली के बीच यदा-कदा हास-परिहास और प्रफुल्लता के दर्शन भी हो जाते हैं। कुल मिलाकर ग्राम-जीवन की बहुरंगी बानगी को उसकी समग्रता में प्रस्तुत करने वाला उपन्यास 'बबूलÓ दलित-जीवन को केन्द्र में रखकर लिखे जाने वाले उपन्यासों में 'मील का पत्थरÓ है। इस उपन्यास के कुछ अति महत्त्वपूर्ण पक्षों को लेकर यह पुस्तक स?पादित की गयी है। उ?मीद है, इससे पाठकों को 'बबूलÓ को समझने में मदद मिलेगी। —चन्द्रशेखर तिवारी