Nalayira Divya Prabandham : Iyarpa (Vol.04) / नालायिर दिव्य प्रबंधम् : इयर्पा (भाग-04)
Author
: Lallan Prasad Sinha
Language
: Tamil in Devnagari
Book Type
: Reference Book
Category
: Vedic Literature
Publication Year
: 1st, 2019
ISBN
:
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: 248 Pages; Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

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 आपके हाथ में जो ग्रंथ है वह विश्व में उपलब्ध ग्रंथों में से एक विलक्षण ग्रंथ है। यह बारह आळवारों द्वारा गाया हुआ सामान्य व्यक्ति का 'वेद' है जिसे ''नालायिर दिव्य प्रबंधम्'' ''अरूलैचेयाल'' भी कहते हैं। इन गीतों को 'पाशुरम्' कहते हैं। भगवान श्री महाविष्णु की अनुकम्पा से ये गीत आऴवारों द्वारा हमें प्राप्त हुए हैं।

नालायिर दिव्य प्रबंधम् एक उल्लेखनीय व विशिष्ट ग्रंथ है। यह एक कालजयी रचना है। बिना इन 4000 गीतों को गाये, 'तिरूमालएवं 'तिरुतलंगल' पर्व अधूरे रह जाते हैं।

जब भगवान शोभायात्रा पर निकल पड़ते हैं तब उनके आगे-आगे चलनेवालें अनेक  वैष्णव पंडितों द्वारा गाये जाने का विलक्षण गौरव नालायर दिव्य प्रबंध को प्राप्त हैं जबकि वेद भगवान के पीछे पीछे आनेवाले वेदज्ञ-पंडितों द्वारा गाया जाता है।

द्राविण (तमिळ (ल)) भाषा में उपलब्ध इस वेद-सार भूत अद्भुत व दिव्य रचनाओं को देवनागरी लिपि में लिपिबद्ध किया गया है।

ये ग्रंथ (नालायिरम्-चार हजार पाशुरोंबला दिव्य प्रबंध) चर-चार पुस्तकों में बहुत ही आकर्षक, प्रभावोत्पादक एवं पारायण हेतु अनुकूल रीति में तैयार किये गये है।