Mahakavi Kalidas Ki Atmakatha / महाकवि कालिदास की आत्मकथा
Author
: Jaishankar Dwivedi
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Category
: Biographies / Autobiographies
Publication Year
: 1987
ISBN
: 9VPMKKKAH
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: xvi + 316 Pages, Size : Demy i.e. 22.5 x 14 Cm.

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महाकवि कालिदास की आत्म-कथा केवल औपन्यासिक संरचना नहीं है। कपिश, पृथ्वी का स्वर्ग, मंजुश्री कपिश की शोभा। ...... कपिश ब्राह्यïा प्रकृति की हरीतिमामयी फैली हुई नैसर्गिक शोभा है। देवि मंजुश्री नारी शक्ति की सौन्दर्यमयी उन्मेषशील एवं विकसनशील प्रतिकृति है। उनकी छरहरी उंंगलियों के स्पर्श में नारी की आद्या शक्ति प्रवहमान है। उनके करतल स्पर्श से मनुष्य की ह्दयगत मोहजनित मुमूर्षा ध्वस्त हो उठती है, जडिमा दूर हो जाती है। वह स्फूर्ति युक्त हो मन की कोरी भावुकता को छोड़ कर्मशील, संयमशील हो जीवनयोद्धा बन जाता है। महाकवि स्वयं जीवनयोद्धा बने। स?पूर्ण भारतवर्ष को जो विघटनशील पारस्परिक विद्वेष युक्त गणतंत्रों मे विभक्त हो बिखरा हुआ था, उसे इन तंत्रों से मुक्त कर एक राष्ट्र का रूप प्रदान किया। वल्लरी का नृत्य, नृत्यकला को धन्य करने वाला है। शास्त्रकारों ने नृत्य को चाक्षुष यज्ञ माना है। वल्लरी उसी की प्रतिमूर्ति है। रजनिका, रानी नागनिका नारी जीवन की उत्सर्गमयी, वैराग्यमयी प्रतीक है। इसमें द्विवेदी जी ने महाकवि स?बन्धी अनेक कथानकों में यत्र-तत्र पड़े अनुबन्धों को एकत्र कर एक रसमय सूत्र में पिरोया है। मंजु और माणवक की कृष्ण-भक्ति। मंजु का भक्तिपूरित भावानुप्रवेश युक्त करुण-मधुर संगीत, उसकी भाव-विहवल मुद्रा विरह व्यथा की शरीर धारिणी प्रतिमू्र्ति बन बैठती है। उसके करुण संगीत से ऐसा जान पड़ता है मानो समस्त दिङ्मण्डल रो पड़ा है। भावानुप्रवेश तो संगीत कला का प्रथम सोपान है। किन्तु संगीत कला का अन्तिम लक्ष्य तो महाभाव की ही अनुभूति है। इसे मंजु के संगीत ने चरितार्थ कर दिया है।