Acharya Ramchandra Shukla / आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
Author
: Ramchandra Tiwari
Language
: Hindi
Book Type
: Reference Book
Publication Year
: 2009
ISBN
: 9788171246533
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: viii + 192 Pages, Append, Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

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आचार्य रामचन्ïद्र शुक्ïल हिन्ïदी के युग-निर्माता, विचारक एवं आचार्य हैं। अनेक दृष्ïिटयों से उनका व्ïयक्तित्ïव अद्वितीय है। जिस समय हिन्ïदी के साहित्ïयकार भाषा और साहित्ïय के सामान्ïय प्रश्ïनों को सुलझाने का बाल प्रयास कर रहे थे, उस समय शुक्ïलजी अपने साहित्ïियक परिवेश का अतिक्रमण कर साहित्ïय, दर्शन, मनोविज्ञान, इतिहास, विज्ञान आदि अनेक क्षेत्रों की नवीनतम उपलब्धियों को आत्ïमसात करके हिन्ïदी के मौलिक काव्ïयशास्ïत्र की आधार शिला रखकर विचार और चिन्ïतन के क्षेत्र में एक नये युग का निर्माण कर रहे थे। नि:सन्ïदेह एक कोश निर्माता, इतिहासकार, निबन्ध लेखक, अनुवादक, आलोचक, स?ïपादक और रचनाकार के रूप में आचार्य शुक्ïल का अवदान अन्ïयतम है। इन सभी क्षेत्रों में उन्ïहोंने पथ-प्रवर्तन का कार्य किया है। प्रस्ïतुत कृति में आचार्य शुक्ïल के समग्र साहित्ïियक अवदान के आकलन का विनम्र प्रयास किया गया है। पुस्ïतक का प्रथम संस्ïकरण आचार्य शुक्ïल के शताब्ïदी वर्ष में उनके प्रति श्रद्धा-सुमन अॢपत करने के प्रयास में लिखा गया था। हिन्ïदी जगतï् ने पुस्ïतक को अपनाकर उत्ïसाहवर्धन किया। पुस्ïतक के इस तृतीय संस्ïकरण में दो अध्ïयाय—'हिन्ïदी आलोचना के क्षेत्र में आचार्य शुक्ïल की क्रान्ïतदर्शी भूमिकाÓ तथा 'आधुनिकता और आचार्य शुक्ïल का लोकादर्शÓ बढ़ाया गया है। शेष अध्ïयायों में यत्र-तत्र कुछ परिवर्धन और परिष्ïकार किया गया है। इस प्रकार अब यह पुस्ïतक अधिक समृद्ध रूप में हिन्ïदी पाठकों को समॢपत है। हमें विश्ïवास है, हिन्ïदी जगतï् इसका स्ïवागत करेगा।