Aangan Ke Phool / आँगन के फूल
Author
: Shriprasad
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Publication Year
: 2003
ISBN
: 9VPAKFP
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: 40 Pages, Size : Demy i.e. 22 x 14 Cm.

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भारतीय जन-जीवन पर साहित्यिकों की सत्ता हजारों वर्षों तक चली और आज भी चल रही है। किस साहित्यिक ने कितना लिखा, उससे उसकी कीमत नहीं आँकी जा सकती, वह तो इससे आँकनी चाहिए कि उसने सामुदायिक जीवन को समृद्ध करने में कितना योग दिया। जो सत्य का यशोगान करे, जीवन का अर्थ समझाये, व्यावहारिक शिक्षा दे और चित्त को शुद्ध करे— वही साहित्य है। शरीर-पोषक क्षर साहित्य टिकाऊ नहीं होता। टिकाऊ होता है वह साहित्य जिसके पीछे शोषणहीन अङ्क्षहसक समाज-रचना की प्रेरणा रहती है। उस प्रेरणा से लिखा गया सर्वोदय साहित्य अक्षर साहित्य है। जब तक समाज में संवेदना है, सहृदयता है, तब तक सर्वोदय-साहित्य टिका रहेगा। यह है— आचार्य विनोबा की साहित्यिक दृष्टिï— जिनका हर वाक्य, हर शब्द और हर ग्रंथ जीवन से जुड़ा है और जिनका विश्वास है कृति से शब्द, शब्द से चिन्तन और चिन्तन से अचिन्तन उत्तरोत्तर अधिक शक्तिशाली है।