Kadambari : Katha Mukhaparyanta (Mahakavi Banabhattavirchit) / कादम्बरी : कथा मुखपर्यन्ता (महाकवि बाणभट्टïविरचितम् )
Author
: Vishwambharnath Tripathi
Language
: Hindi
Book Type
: Text Book
Category
: Sanskrit Literature
Publication Year
: 2008
ISBN
: 9788171245178
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
:

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कादम्बरी की कथावस्तु बाण ने बृहत्कथा से ग्रहण की है। बृहत्कथा पैशाची भाषा में लिखी गयी थी। दुर्भाग्यवश यह कृति आज अपने मूलरूप में अनुपलब्ध है। क्षेमेन्द्र की बृहत्कथा मञ्जरी और सोमदेव के कथासरित्सगार में इसका संक्षिप्त रूप पाया जाता है। बाण को गुणाढ्य की बृहत्कथा ज्ञात थी। इसी कथानक को बाण ने अपनी कारयित्री प्रतिभा और अपूर्व कल्पनाशक्ति से सरस, जीवन्त तथा हृदयग्राही बना दिया है। यह सही है कि बाण ने कथानक को कथासरित्सागर से लिया है किन्तु यह भी एक तथ्य है जैसा कि डॉ० पीटर्सन ने कहा है कि कथासरित्सागर अस्थिमात्र है जो पूर्णत: सूखी है। यह सूखी हड्डी जीवन्त बना दी गयी है; क्योंकि इसमें प्राण फूँक दिया गया है। मांस आदि को त्वचा से ढँक दिया गया है। वर्णन की विविधता और विशदता में बाण ने अपनी मौलिक कल्पना को साकार बनाया है। कालिदास तथा शेक्सपियर जैसे महान् कवि भी कथानक को इतिहास-पुराणों से चुनते हैं किन्तु अपनी मौलिक कलात्मक शक्ति से वह उनमें अद्भुत निखार ला देते हैं। बाण भी इस श्रेय के कम भागी नहीं है। कथासरित्सागर की कथा मन बहलाव मात्र करती चलती है जबकि बाण की अतिद्वयी कथा (धिया निबद्धेयमतिद्वयी कथा) मन्द गति से चलती हुई सविस्तार विभिन्न दृश्यों को चित्रित करती हुई जीवन्त वर्णन प्रस्तुत करती है। कलात्मक सर्जना, वर्णन की अद्भुत क्षमता, पात्रों की सजीवता, मानव-मन को समझने की शक्ति, समुन्नत शैली आदि बाण की मौलिकताएँ हैं जो कादम्बरी को कथासरित्सागर से पृथक् करती है।