Kokil Bol Raha (Lalit Nibandh) / कोकिल बोल रहा (ललित निबन्ध)
Author
: Yogeshwar
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Publication Year
: 2004
ISBN
: 8171243401
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: viii + 80 Pages, Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

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सोलह निबन्धों का संग्रह— छोटा, किन्तु सागर समेटे है। आधे से अधिक निबन्धों का सन्दर्भ स्वयं ललित है। इसलिए कि वे किसी न किसी कविता के अंग हैं—जीवित, जाग्रत बिम्बित अंग। युगेश्वर एक ङ्क्षचतक लेखक हैं। अत: इन निबन्धों में ङ्क्षचतन की गम्भीरता, बौद्धिक सहजता, सरलता सौम्य रूप में है। ङ्क्षचतन की रुक्ष दुरूह उपलब्धियाँ भाव प्रवण और सुकोमल हो गयी हैं। विचार और विवेचनाएँ सहज मित्र बन गयी हैं—सखी जैसी। ज्ञान भी, मिठास भी, ज्ञान राग बना है। राग ने ज्ञान का सहकार किया है। विवेचना और बौद्धिकता में एक प्रकार का विराग है। ऋषि का रूखापन, किन्तु ललित में बसन्त की मधुर मुसकान झलकती है। यहाँ गद्य में सूखता रस पुनर्नवा हो गया है। ललित निबन्धों की परम्परा में इन सोलह युवा निबन्धों का स्थान विशिष्ट है। सभी निबन्ध एक साथ ही मन, बुद्धि और हृदय की तुष्टि, पुष्टि और सृष्टि करते हैं—त्रयो गुणा:।