Aghor Panth aur Santh Keenaram / अघोर पंथ और संत कीनाराम
Author
: Shusila Mishra
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Publication Year
: 2016
ISBN
: 9789351461203
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: x + 206 Pages, biblio, Plates, Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

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१६वीं-१७वीं शताब्दी के कालजयी औघड़ संत बाबा कीनाराम साक्षात् शिव थे। जनश्रुतियों के अनुसार शिव की नगरी काशी के शिवाला स्थित क्रीं-कुण्ड के औघड़ तख्त पर बाबा कीनाराम का सन् १६१९ में अभिषेक हुआ था। उस समय उनकी उम्र मात्र १९ वर्ष थी। अभिषेक के पूर्व वे अपने तपस्याकाल में माँ ङ्क्षहगलाज के दरबार में अपनी तपस्या पूर्ण करने पहुँचे। वहाँ उन्होंने घोर तपस्या की। माँ ङ्क्षहगलाज ने प्रसन्न होकर कहा—'तू अब काशी जा। वहीं मैं भी आऊँगी और वहीं रहूँगी।' यहाँ भैरव भीमलोचन ने भी उन्हें दर्शन दिये। माँ की आज्ञा से बाबा कीनाराम जी काशी स्थित महाश्मशान हरिश्चन्द्र घाट आये। जहाँ दत्तात्रेय भगवान् के रूप में बाबा कालूरामजी ने औघड़ तख्त क्रीं-कुण्ड के पीठाधीश्वर पद पर बाबा कीनाराम का अभिषेक किया। कहा जाता है माँ हिंगलाज क्रीं-कुण्ड में हर पल अदृश्य स्वरूप में विद्यमान हैं। बाबा कीनाराम अघोरपंथ के अग्रणी संत थे, उनके भक्तिपद अघोरपंथ के सूत्र हैं। उनके अनेक चमत्कार हैं जो भक्तों को प्रभावित करते हैं, अघोरपंथ की यह परम्परा क्रीं-कुण्ड में आज भी साक्षात् है।