Kalateet / कालातीत
Author
: Viveki Rai
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Category
: Hindi Novels / Fiction / Stories
Publication Year
: 2005
ISBN
: 8190253433
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: x + 86 Pages, Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

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''साहित्य अपने समय का सच्चा इतिहास होता हैÓÓ। प्रेमचंद के उपर्युक्त कथ्य का डॉ० विवेकी राय के साहित्य में पूरी तरह साक्षात किया जा सकता है, जहाँ स्वातंत्र्योत्तर भारतीय गाँवों का सच चित्रित तो है हि, साथ-साथ नवसृजनवादी सोच को पर्याप्त प्रोत्साहन तथा प्रगतिशील सामाजिक ढाँचे को मजबूत करने का प्रयास भी मुखर है। प्रस्तुत कहानी-संग्रह 'कालातीतÓ डॉ० विवेकी राय का पाँचवाँ कहानी-संग्रह हैं, जिसमें कुल सत्रह कहानियाँ है और प्रत्येक कहानी का उद्देश्य तत्कालीन भारतीय गाँवों की दुर्दशा को सम्मुख करते हुए व्यवस्था के खोखलेपन को उजागर करना है। संग्रह की सभी कहानियाँ पाठकों को उद्वेलित कर कुछ सोचने को विवश करने की क्षमता रखती हैं। संग्रह की इन कहानियों में ललित चिन्तन के साथ-साथ काव्यात्मक सरसता भी है जो कहानीकार की सर्जनात्मक क्षमता के साथ-साथ संवेदना को प्रत्यक्ष करती है। संग्रह की सभी कहानियों की भाषा, भाव और परिवेश के अनुरूप हैं। ये कहानियाँ अलग-अलग कोनों से, गाँवों से हमारा साक्षात्कार कराती चलती हैं। प्रेमचंद अपनी कहानियों में महाजनी समाज से लड़ते-जूझते नजर आते हैं, तो डॉ० विवेकी राय भी अपनी कहानियों में छद्म राजनीति व विकास के नारों से दो-दो हाथ करते दिखाई देते हैं। फणीश्वरनाथ रेणु ग्रामीण परम्पराओं और अन्तर्सम्बन्धों की संवेदनाओं को व्यक्त करते हैं जहाँ एक-दूसरे के प्रति समवेदना, आपसी उत्साह व विनोद प्रचुर व प्रगाढ़ है, वहीं डॉ० राय अपनी रचनाओं में इन तत्त्वों के साथ साथ विकास के प्रति व्याकुलता रखते हैं और दुव्र्यवस्थाओं पर तीखा प्रहार भी करते हैं। ''गाजीपुर शहर डॉ० विवेकी राय का कुछ नहीं बिगाड़ सका, नगरीय संस्कृति के छींटे भी नहीं पड़े उन पर। हाँ, एक फायदा अवश्य हुआ कि उन्होंने शहर में रहकर साहित्य में प्रयुक्त गँवईपन को बचाने-बढ़ाने तथा उन्हें आम लोगों तक पहुँचाने का नया-नया अस्त्र खोज निकाला। नयी व पारम्परिक दृष्टि से एक साथ तत्कालीन गाँवों को देखने का तरीका डॉ० राय को खूब मालूम है।ÓÓ - डॉ० नामवर सिंह