Gunga Jahaj (Short Stories) / गूंगा जहाज
Author
: Viveki Rai
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Category
: Hindi Novels / Fiction / Stories
Publication Year
: 2005
ISBN
: 8190253425
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: x + 118 Pages, Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

MRP ₹ 120

Discount 20%

Offer Price ₹ 96

'गूँगा जहाजÓ डॉ० विवेकी राय की प्रतिनिधि कहानियों का ऐसा संग्रह है जिसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्राम्यांचल (गाजीपुर बलिया) की सटीक पड़ताल है, स्वातंत्र्योत्तर गाँवों व ग्रामीण समाज के बदलते रूप की उनकी आधुनिक मुद्रा और विविध अन्तर्विरोधी टकराहटों सहित बड़ी ही गहराई से पहचान है, ग्रामीण किसानों-श्रमजीवियों की समस्याओं, दु:खों व शोषण से उत्पन्न छटपटाहटों पर केन्द्रित दृष्टि है और ग्रामवासियों का परिस्थितिजन्य व पारस्परिक विनोद व मनोरंजन का चित्रण भी। 'गूँगा जहाजÓ में इक्कीस कहानियों द्वारा डॉ० विवेकी राय ने अपनी स्थानीयता, संस्कृति व भोगे हुए यथार्थ केप्रति निष्ठा व समर्पण का वही प्रमाण पुष्ट किया है जो उनके सम्पूर्ण लेखक व्यक्तित्व में पोर पोर है। डॉ० राय ने इन कहानियों के माध्यम से हास्य-विनोद का पुट देते हुए स्वातन्त्र्योत्तर ग्रामीण समाज के बदलते रूप, उनकी अभावग्रस्तता, उनके धूमिल वस्त्रों में आवेष्ठित सूखे-जर्जर शरीर में आप्लावित रसधारा जिसे करुणा का क्षणिक और सामान्य स्पर्श भी नैराश्य के गहन अंधकार से ऊपर ला देता है, बहुत बारीकी से प्रस्तुत किया है। राजनीतिक दुकानदारी से उत्पन्न ग्रामीण बौद्धिक तनाव तथा öासमान पूँजीवादी सांस्कृतिक रुग्णता को लेकर नगरों से गाँव को लौटने वाले शिक्षित बाबू (सामन्त) वर्ग द्वारा देहातों को कस्बाई रंग देने की लालसा, किसान का प्रकृति से संघर्ष और निराशा के झूले पर झूलती हुई जीजीविषा से सम्पृत्त इन कहानियों में पाठकों को मर्माहत कर देने की क्षमता है। 'गरीबी हटाओÓ की नपुंसक नारेबाजी तथा विकास, प्रगति और क्रान्ति के अर्थहीन पोस्टरों से ऊबे जनमानस की घुटन, किन्तु जागरूक रहकर आने वाली पीढ़ी को सचेत करने का स्वर घण्टे की टनटनाहट की भाँति संकलन की कहानियों से मुखर है। गूँगा जहाज की कहानियों में स्थान, पात्र व घटनाओं का विवरण कुछ इस प्रकार है कि पाठक उसे आत्मकथा के रुप में लेता है,कुछ बिलकुल सच हैं भी। ग्राम्यांचल की विविध झाँकियों से परिपूर्ण कहानियों के इस संग्रह में डॉ० राय ने अपने अन्दर के प्रौढ़ भाषाविद् व कथाशिल्पी को खूब खटाया है, जिसके फलस्वरूप पाठक चित्रों के यथार्थ लोक में विचरण करता है। कसावपूर्ण कथ्यों के साथ साथ लगभग सभी कहानियाँ पाठकों को प्रभाव की गहराई पर लाकर छोड़ती हैं और बिम्बों का ऐसा अहसास कराती हैं कि कभी-कभी (कहानियों का) रिपोर्ताज होने का भ्रम होने लगता है। 'ग्राम जीवन के कथा शिल्पी डॉ० विवेकी रायÓ प्रेमचंद और फणीश्वरनाथ रेणु (राही मासूम रजा भी) के बाद की पीढ़ी के सबसे सशक्त कथाकारों में शिखरस्थ हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता बाद के गाँवों को अपनी रचनाओं में केन्द्रित रखा।