Dhurtakhyan / धूत्र्ताख्यान
Author
: Dr. Shriranjan Surideva
  Acharya Haribhadra Suri
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Publication Year
: 2005
ISBN
: 8190253441
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: xii + 44 Pages, Size : Demy i.e. 21.5 x 13.5 Cm.

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भारतीय व्यंग्य-काव्यों में 'धूत्र्ताख्यानÓ का अद्वितीय स्थान है। इस काव्य के रचयिता आचार्य हरिभद्र सूरि हैं, जो ईसा की आठवीं-नवीं शती के श्रमण परम्परानुयायी प्रकाण्ड प्रतिभाशाली श्वेताम्बर जैन आचार्यों में अपना विशिष्टï अभिज्ञान रखते हैं। 'धूत्र्ताख्यानÓ की कथावस्तु अतिशय सरल और प्रांजल है। इसमें पाँच धूत्र्तों की कथा है। प्रत्येक धूत्र्त असम्भव, अबुद्धिगम्य और काल्पनिक कथा कहता है, जिसको दूसरा धूत्र्त साथी रामायण, महाभारत, विष्णुपुराण, शिवपुराण आदि ग्रंथों के समानान्तर कथा प्रमाण उद्धत कर अपना समर्थन देता है। अन्तिम पाँचवीं कथा एक धूत्र्त भी कहती है और वह कथा कहने की प्रक्रिया बदल देती है। वह अपने जीवन की अनुभव कथा तो सुनाती ही है और स्वयं ही पौराणिक आख्यानों से उसका समर्थन भी करती है। अन्त में वह यह कह कर चारों धूत्र्तों को आश्चर्यचकित कर देती है कि यदि वे उसकी अनुभव कथा को सत्य मान लें, तो उन्हे उसका दास बनना पड़ेगा और यदि उसके समान्तर कहे गये पौरणिक आख्यानों को असत्य मानें, तो सभी को भोजन देना पड़ेगा। इस प्रकार, एक नारी अपनी चतुराई और पाण्डित्य से उन चारों धूत्र्त पुरुषों को मुर्ख बनाती है।