Adikalin Hindi Sahitya / आदिकालीन हिन्दी साहित्य ( पुन: परीक्षण नवोपलब्ध सामग्रियों के आलोक में) १०००-१४०० ई०
Author
: Dr. Shambhu Nath Pandey
Language
: Hindi
Book Type
: Reference Book
Publication Year
: 1970
ISBN
: 9VPAHSH
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: xii + 280 Pages, Size : Demy i.e. 22 x 14 Cm.

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आदिकालीन हिन्दी साहित्य (पुन: परीक्षण नवोपलब्ध सामग्रियों के आलोक में (1000-1400 ई०) शोध-प्रबन्ध हिन्दी-साहित्य के आदिकाल के सम्बन्ध में पूरी जानकारी प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत करता है। इस काल के सम्बन्ध में बहुत कम लिखा गया है। जो लिखा भी गया है, वह समग्र हिन्दी साहित्य को दृष्टिï में रखते हुए इतिहास के 'एक कालÓ या 'अंगÓ के रूप में ही। सर्वप्रथम, इस ग्रन्थ में आदिकालीन हिन्दी साहित्य का विशद एवं पुन:परीक्षत इतिहास प्रस्तुत किया गया है जिसमें काल-विभाजन तथा नामकरण पर भी नये ढंग से विचार किया गया है। नवोपलब्ध सामग्रियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि काव्यरूपों, कथानक रूढिय़ों, छंदों तथा पूर्ववॢतनी भाषाओं के नये सम्बन्ध-सूत्रों एवं परवर्ती साहित्य पर पड़े अमिट अभावों की दृष्टिï से यह काल बड़ा ही समृद्ध एवं महत्त्वपूर्ण है। साहित्य के अध्येताओं एवं अनुसन्धित्सुओं के लिए यह ग्रन्थ अपरिहार्य सिद्ध होगा और हिन्दी साहित्य के इतिहास को नया आलोक प्रदान करेगा। अनुक्रम : प्रस्तावना, 1. विषय-प्रवेश, 2. हिन्दी-साहित्य के आदिकाल के नामकरण की समस्या, 3. मध्यदेशीय सामग्री की विच्छिन्न परम्परा, कारण और परिणाम, 4. हिन्दी साहित्य के आदिकाल का धारावाहिक इतिहास, 5. आदिकालीन हिन्दी साहित्य के विविध काव्यरूप, 6. आदिकालीन हिन्दी साहित्य की काव्य एवं कथानक रूढिय़ाँ, 7. आदिकालीन हिन्दी-साहित्य में प्रयुक्त छंदों का अनुशीलन, उपसंहार, संदर्भ-ग्रन्थ सूची। हिन्दी-साहित्य का आदिकाल स?पूर्ण हिन्दी-साहित्य का बहुत ही महत्त्वपूर्ण काल है। विषम परिस्थितियों के कारण यह काल प्रामाणिक सामग्री के अभाव से ग्रस्त रहा, परिणामस्वरूप यह अपने सही रूप में विश्लेषित और मूल्यांकित नहीं हो पाया। इसे अन्धकारयुग की ही संज्ञा नहीं दी गयी वरन् इसके बारे में और भी कई तरह के प्रश्नचिह्नï लगाये जाते रहे। परन्तु इधर तीस-चालीस वर्षों से संस्थाओं और अन्वेषकों के प्रयास से अनेक अज्ञात तथा अल्पज्ञात सामग्रियों का सन्धान मिला है। इन नवोपलब्ध सामग्रियों से हिन्दी-साहित्य के आदिकाल का बड़ा ही स्पष्टï, वैचित्र्यपूर्ण तथा समृद्ध चित्र उद्घाटित हुआ। यह ग्रन्थ बड़े ही लगन और परिश्रम से नवोपलब्ध सामग्रियों को एकत्र कर उनके आलोक में हिन्दी-साहित्य के आदिकाल का परीक्षणात्मक रूप प्रस्तुत किया गया है। हिन्दी-साहित्य के आदिकाल को आलोकित करने वाला यह पहला महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है।