Ek Panva Par Ganva / एक पाँव पर गाँव (गजल-संकलन)
Author
: Dr. Satyanarayan Tripathi
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Publication Year
: 2005
ISBN
: 8171244599
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: 112 Pages, Size : Demy i.e. 22 x 14.5 Cm.

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कविता हो या गजल, सभी कहने के हुनर हैं। गजल तो एक खास किस्म की गुफ्तगू है, प्रेम-वार्ता है। सुनाते समय जबान से कान का एक अद्भुत रिश्ता जोडऩा गजल के लिए ही सम्भव है। गजल की प्रेषणीयता गंध की तरह सहज प्रसरणशील है। गजल का बीज भाव प्रेम है। किन्तु अब उसमें अनुभूति के अनेक नए क्षितिज आलोकित हो रहे हैं। गजल की रचना शब्द-व्यापार से भिन्न शब्द-बरताव की कला है। तभी तो जिन्दगी को शब्दों में ही जीना होता है, गजल रचते समय। गजल की रचना-प्रक्रिया बूँदों से सागर भरने की नहीं, अपितु बूँद-बूँद से सागर बनने की है। गजल शायरी की एक हसीन महफिल है। काफिए शायर हैं और रदीफ शमा। इसी शमा के झिलमिलाते उजास में काफिए अपना शेर कहते हैं। एक काफिया अपना शेर कहने के बाद शमा को दूसरे के सामने खिसका देता है। इस तरह जब शमा अन्तिम काफिए के सामने से गुजर जाती है तो महफिल खत्म हो जाती है और गजल बन जाती है। वही गजल-गजल है जो काफिए की कही और रदीफ की शमा से आलोकित है। पाँव गति है, प्रगति है और जीवन पद्धतियों का निर्माता है। यह मनुष्य के दिक्काल की माप और उसकी गतिशीलता का सन्तुलन है। यह विकास का चरण, गतिविधि की पैरवी और सफलता का धावक है। यह कर्म मेे धर्म में है, साहित्य में है और कला में हेै। यह जिन्दगी का स्तम्भ और मानवके गाँव का आधार है। गाँव हम हैं और आप हैं, हमारा देश है, विश्व है। यही हमारा बाहरी संसार और ह्दय का देश है। संस्कृति सभ् यता और मानव-धर्म इसकी पहचान है। प्रकृति का भास्वर वैभव वैभव इसी की शोभा है। 'एक पाँव पर गाँवÓ से गुजरते हुए इस गाँव की प्रतीतियाँ प्रकृति और पुरुष के शाश्वत साहचर्य का किसी न किसी रूप में आप को एहसास कराएँगी।