Aacharya Vinoba Ki Sahitya Dristi / आचार्य विनोबा की साहित्य दृष्टि
Author
: Dr. Suman Jain
Language
: Hindi
Book Type
: Reference Book
Publication Year
: 2006
ISBN
: 8171244866
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: xii +208 Pages, Append., Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

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भारतीय जन-जीवन पर साहित्यिकों की सत्ता हजारों वर्षों तक चली और आज भी चल रही है। किस साहित्यिक ने कितना लिखा, उससे उसकी कीमत नहीं आँकी जा सकती, वह तो इससे आँकनी चाहिए कि उसने सामुदायिक जीवन को समृद्ध करने में कितना योग दिया। जो सत्य का यशोगान करे, जीवन का अर्थ समझाये, व्यावहारिक शिक्षा दे और चित्त को शुद्ध करे-वही साहित्य है। शरीर-पोषक क्षर साहित्य टिकाऊ नहीं होता। टिकाऊ होता है वह साहित्य जिसके पीछे शोषणहीन अङ्क्षहसक समाज-रचना की प्रेरणा रहती है। उसी प्रेरणा से लिखा गया सर्वोदय साहित्य अक्षर साहित्य है। जब तक समाज में संवेदना है, सह्यïदयता है, तब तक सर्वोदय साहितत्य टिका रहेगा। यह है- आचार्य विनोबा की साहित्यक दृष्टिï- जिनका हर वाक्य, हर शब्द और हर ग्रंथ जीवन से जुड़ा है और जिनका विश्वास है कृति से शब्द, शब्द से चिन्तन और चिन्तन से अचिन्तन उत्तरोत्तर अधिक शक्तिशाली है।