Pragatisheel Alochana Ki Parampara Aur Dr. Ramvilas Sharma / प्रगतिशील आलोचना की परम्परा और डॉ. रामविलास शर्मा
Author
: Dr. Rajeev Singh
Language
: Hindi
Book Type
: Reference Book
Publication Year
: 2000
ISBN
: 8171242626
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
: x + 122 pages, Biblio., Size : Demy i.e. 22 x 14 Cm.

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डॉ० रामविलास शर्मा माक्र्सवादी आलोचक चिन्तक हैं। लेकिन वे माक्र्सवादी ऑर्थोडॉक्स चिन्तक नहीं हैं। डॉ० शर्मा ने देशकाल के अनुसार माक्र्सवादी विचारधारा में कुछ जोड़ा तो कुछ घटाया भी है। उनका जोड़-घटाव ही उन्हें माक्र्सवादी आर्थोडॉक्स चिन्तक से अलग करता है। माक्र्सवाद के प्रति डॉ० शर्मा की जितनी आस्था है उसकी तुलना में भारतीय ऊध्र्वोमुखी परम्परा के प्रति कम नहीं कही जा सकती। डॉ० शर्मा ने जातीय संस्कृति को मथते हुए उससे निरन्तर अमृत निकालने का कार्य किया है। उनका मानना है कि अपनी संस्कृति को भूलना अथवा उसकी अवज्ञा करना अपराध है। इस पुस्तक में शर्माजी के साहित्यिक, भाषिक, समाजशास्त्रीय, सांस्कृतिक आदि चिन्तन को संभवत: और संश्लिष्टïत: विवेचित करने का यथास?भव प्रयास किया गया है। विषय क्रम, भूमिका, १. आलोचना की परम्परा का नया प्रवर्तन, २. परम्ïपरा का पुनर्मूल्ïयांकन : भक्ति और रीतिकाल, ३. कथा साहित्ïय : यथार्थ की खोज, ४. इतिहास और आलोचना, ५. साहित्ïय साधना और निराला, ६. छायावादी काव्ïय और नई कविता, ७. माक्ïर्सवादी सौन्ïदर्यशास्ïत्र, ८. आलोचना की भाषा, ९. भारतीय संस्ïकृति और हिन्ïदी प्रदेश।