Kashi Ka Rang Parivesh / काशी का रंग परिवेश
Author
: Kunwar Ji Agrawal
Language
: Hindi
Book Type
: Reference Book
Category
: Benares / Kashi / Varanasi / Ganga
Publication Year
: 1986
ISBN
: 9VPKKRPH
Binding Type
: Hard Bound
Bibliography
:

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हिन्दी नाट्यसाहित्य और रंगमंच के इतिहास में काशी की भूमिका बेहद महत्त्वपूर्ण रही है। यहाँ गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के आधार पर रामलीला की शक्ल में भक्तिकाल के एक अत्यन्त मौलिक और विलक्षण नाट्यरूप का विकास किया, यही से जानकी मगल की प्रस्तुति के द्वारा आधुकि हिन्दी रंगमंच की शुरुआत हुई और भारतेन्दु ने आधुनिक हिन्दी नाट्यांदोलन का समारंभ किया। जयशंकर प्रसाद के नाटकों के बीज यहीं की मिट्टïी में अंकुरित हुए और आगा हश्र के नाटकों में अक्सर काशी की माटी की सोंधी महक रची-बसी मिल जाती है। इस पुस्तक में काशी के उसी रंग-परिवेश के विश्लेषण की कोशिश है, जिसने हिन्दी के सम्पूर्ण नाटक-साहित्य और रंगमंच के विकास को काफी दूर तक अनुशासित किया है। भारतेन्दु और प्रसाद जैसे हिन्दी के मूर्धन्य नाटककारों की रचना-प्रक्रिया के कुछ अंतरंग, किन्तु बेहद महत्त्वपूर्ण सर्जन-सूत्रों का उद्घाटन इस पुस्तक में हुआ है। काशी का रंगपरिवेश हिन्दी के नाट्य-इतिहास-लेखन के सार्थक आयामों की ओर इशारा करनेवाली पहली पुस्तक है। काशी और इस तरह संपूर्ण हिन्दी के नाट्य-इतिहास का एक आकर ग्रंथ। हिन्दी नाट्य-इतिहास के कुछ दुर्लभ दस्तावेजों का संकलन भी इस पुस्तक में किया गया है।