Parlok Ke Khulate Rahasya / परलोक के खुलते रहस्य
Author
: Arun Kumar Sharma
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Category
: Arun Kumar Sharma on Yog-Tantra-Sadhana
Publication Year
: 2016
ISBN
: 9788190679688
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: viii+76+332=416 Pages, Size : Demy i.e 22 x 14 Cm.

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परामनोविज्ञान के अनुसार परलोक से कोई वापस नहीं लौटता और मृत्यु के बाद पुन: उसी शरीर में भी आत्मा वापस नहीं आती। यदि कहीं परलोक है तो उसका अनुभव एक परमयोगी ही कर सकता है। साधारण लोगों के लिए परलोक का अनुभव केवल रहस्य के अलावा और कुछ नहीं है। मृत्यु या तो भविष्य में या फिर अतीत में है, वर्तमान में उसका अस्तित्व नहीं है। वर्तमान में केवल जीवन है। इसलिए जीवन को जाना, समझा जा सकता है और उसे जिया जा सकता है। जीवन के स?बन्ध में विचार करने वाले लोग उसे गवाँ बैठते हैं। इसलिए कि विचार की गति भूत और भविष्य में है। 'विचारÓ वर्तमान में नहीं होता। वर्तमान में वह मृत है और यही कारण है कि वर्तमान में जीवन का विचार नहीं होता, होती है मात्र अनुभूति। प्राणतत्त्व अति महत्त्वपूर्ण है। इसकी सत्ता स्वतंत्र है। शरीर पांच तत्त्वों से निर्मित है। प्राणतत्त्व के माध्यम से आत्मतत्त्व से उनका स?बन्ध बनता है और शरीर हो जाता है चैतन्य जिसे हम जीवन कहते हैं। पंचतत्त्वों का क्रमश: क्षय होता है। पंचतत्त्व निॢमत शरीर का क्षय होता है, परिवर्तन नहीं। लेकिन प्राणतत्त्व के बीच से हटते ही आत्मतत्त्व अलग हो जाता है शरीर से। इसी का नाम मृत्यु है। जीवात्मा का कभी पतन या विनाश नहीं होता। वह कभी समीप और कभी दूर नाना योनियों में भ्रमण करता है। वह कभी अनेक गुणधारण करता है और कभी नीच योनियों में नि?न गुणधारण करता है। इस प्रकार वह बार-बार संसार में आता जाता है। पुनर्जन्म को कल्पना प्रागैतिहासिक काल में मानव मन में तब आई होगी, जब उन्होंने अपने सपनों में अपने को अपने पूर्वजों के साथ सर्वथा अज्ञात परिवेशों में देखा होगा। आत्मा अगर है और विभिन्न प्राणियों के शरीरों में प्रवेश कर बार-बार जन्म लेती है। यदि मनुष्य अनियन्त्रित इन्द्रियों की दासता से मुक्ति पा सके तो वह ज्ञानी हो जाता है। मृत्यु स्वप्न विहीन निद्रा है और पुनर्जन्म का द्वार है। कामना ही पुनर्जन्म का कारण है। वास्तविक जीवन का प्रार?भ मृत्यु के बाद ही होता है। आत्मा सूक्ष्म होती है और हमारे पूर्वकर्म ही हमारे वर्तमान जीवन के कारण हैं। प्रत्येक आत्मा मूलत: शाश्वत है। सभी आत्माएँ पूर्णता की ओर बढ़ रही है तथा जीवन और मृत्यु उसकी अवस्थाएँ हैं।