Dirghau Ke Rahasya / दीर्घायु के रहस्य (दीर्घ जीवियों के अनुभव सहित)
Author
: Vinay Mohan Sharma
Language
: Hindi
Book Type
: General Book
Category
: Yoga, Meditation, Health & Treatment
Publication Year
: 1995
ISBN
: 9APDKRH
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: xvi + 128 Pages, Append., Size : Demy i.e. 22 x 13.5 Cm.

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'काश मेरे शरीर पर सदा यौवन बसन्त महकता रहता, लावण्य का आकर्षण बरसता रहता, मेरी आँखों की ज्योति मन्द न पड़ती, मेरे सारे अंग जीवनोपभोग के साथ देते और मेरा अन्त ही न होता।Ó यह कामना कितने स्त्री-पुुरुषों में नहीं होती। शरीर को 'जीर्णानि वसनानिÓ समझकर छोडऩे की इच्छा कितने वृद्धों को होती है? सच बात तो यह है कि हम इसीलिए जिन्दा हैं कि हम जिन्दा रहना चाहते हैं। पर क्या हम 'अमरत्वÓ की कामना करके अमर हो सकते हैं? इस प्रश्न का उत्तर आसानी से नहीं दिया जा सकता। वैज्ञाकि 'शरीर के जीर्णÓ भाग को मशीनरी के घिसे हुए कल-पुरजों की भाँति बदलने का प्रयत्न कर रहे हैं और उनमें से कइयों का दावा भी है कि एक समय आयेगा जब मनुष्य को मृत्यु बुलाने नहीं आयेगी, वह मृत्यु को बुलायेगा और उसकी गोद में आत्म-समर्पण कर देगा। शरीर और मन की साधना करने वाले भारतीय 'योगीÓ स्वेच्छा से प्राणों का त्याग करते सुने जाते हैं। साधारण मनुष्य यदि 'इच्छामरणीÓ नहीं बन सकता, तो दीर्घजीवी बनना उसके हाथ में अवश्य है। इस पुस्तक में हम दीर्घजीवन में सहायक होने वाले उपायों की चर्चा करेंगे।